शुक्रवार 8 मई 2026 - 09:34
दिल्ली में "आइना-ए-आफ्ताब" का प्रकाशन; आयतुल्लाह सय्यद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई को सर्वोच्च नेता चुने जाने पर मराजे और उलेमा के ऐतिहासिक पैग़ामात पर आधारित अनोखा दस्तावेज़

शिया उलेमा असेंबली (हिंदुस्तान) द्वारा तैयार किया गया अनोखा पुस्तिका "आइना-ए-आफ्ताब" का विमोचन नई दिल्ली के इमामिया हॉल में ऑल इंडिया शिया काउंसिल के तत्वावधान में आयोजित "अमीने इंक़लाब कांफ्रेंस" के अवसर पर इस्लामी गणराज्य ईरान के राजदूत और हिंदुस्तान के वरिष्ठ विद्वानों द्वारा किया गया। इस पुस्तिका में रहबर-ए-मुआज़्ज़म आयतुल्लाह सैयद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई (दाम-ज़िल्लुहुल-आली) के पद-ए-रहबरी पर चुने जाने के अवसर पर मराजे-ए-किराम, फ़ुक़हा और जलील-उल-क़द्र उलेमा के पैग़ामात और तअस्सुरात को एक साथ संकलित किया गया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट अनुसार, शिया उलेमा असेंबली (हिंदुस्तान) द्वारा तैयार किया गया अनोखा पुस्तिका "आइना-ए-आफ्ताब" का विमोचन नई दिल्ली के इमामिया हॉल में ऑल इंडिया शिया काउंसिल के तत्वावधान में आयोजित "अमीने इंक़लाब कांफ्रेंस" के अवसर पर इस्लामी गणराज्य ईरान के राजदूत और हिंदुस्तान के वरिष्ठ विद्वानों द्वारा किया गया। इस पुस्तिका में रहबर-ए-मुआज़्ज़म आयतुल्लाह सैयद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई (दाम-ज़िल्लुहुल-आली) के पद-ए-रहबरी पर चुने जाने के अवसर पर मराजे-ए-किराम, फ़ुक़हा और जलील-उल-क़द्र उलेमा के पैग़ामात और तअस्सुरात को एक साथ संकलित किया गया है।

शिया उलेमा असेंबली हिंदुस्तान द्वारा प्रकाशित पुस्तिका "आइना-ए-आफ्ताब" को वैज्ञानिक, बौद्धिक और ऐतिहासिक दृष्टि से एक अनोखी प्रस्तुति माना जा रहा है, जिसमें उन मराजे-ए-किराम, जलील-उल-क़द्र फ़ुक़हा और उलेमा के पैग़ामात और तअस्सुरात को शामिल किया गया है, जो उन्होंने रहबर-ए-मुआज़्ज़म आयतुल्लाह सैयद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई (द) का सर्वोच्च नेता के पद पर चुने जाने के अवसर पर प्रस्तुत किए थे।

दिल्ली में "आइना-ए-आफ्ताब" का प्रकाशन; आयतुल्लाह सय्यद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई को सर्वोच्च नेता चुने जाने पर मराजे और उलेमा के ऐतिहासिक पैग़ामात पर आधारित अनोखा दस्तावेज़

यह पुस्तिका न केवल उस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक चरण को दर्शाती है, बल्कि इस्लामी दुनिया के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक हलकों की अंतर्दृष्टि, एकता और धार्मिक नेतृत्व पर विश्वास को भी उजागर करती है। "आइना-ए-आफ्ताब" अपने पाठक को एक ऐसी बौद्धिक यात्रा से परिचित कराती है, जहाँ नेतृत्व, धार्मिक रहबरी और उम्मत-ए-मुस्लिमा की सामूहिक चेतना को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

इस पुस्तिका में शामिल लेखन विभिन्न विचारधाराओं से संबंधित उलेमा द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं, जो इस सच्चाई की गवाही देते हैं कि एक मजबूत, सूझबूझ रखने वाला और दूरदर्शी नेतृत्व उम्मत-ए-मुस्लिमा को एकता और स्थिरता के मार्ग पर आगे बढ़ा सकता है।

दिल्ली में "आइना-ए-आफ्ताब" का प्रकाशन; आयतुल्लाह सय्यद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई को सर्वोच्च नेता चुने जाने पर मराजे और उलेमा के ऐतिहासिक पैग़ामात पर आधारित अनोखा दस्तावेज़

आयोजकों के अनुसार "आइना-ए-आफ्ताब" केवल पैग़ामों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन और बौद्धिक जागरूकता का साधन बन सकता है। विशेष रूप से इस्लामी राजनीति, धार्मिक नेतृत्व और समकालीन इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह पुस्तिका एक मूल्यवान वैज्ञानिक संपत्ति का दर्जा रखती है।

दिल्ली में "आइना-ए-आफ्ताब" का प्रकाशन; आयतुल्लाह सय्यद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई को सर्वोच्च नेता चुने जाने पर मराजे और उलेमा के ऐतिहासिक पैग़ामात पर आधारित अनोखा दस्तावेज़

उल्लेखनीय है कि इस पुस्तिका का औपचारिक विमोचन 5 मई 2026, मंगलवार को नई दिल्ली के इमामिया हॉल में आयोजित "अमीने इंक़लाब कांफ्रेंस" के दौरान इस्लामी गणराज्य ईरान के राजदूत और हिंदुस्तान के वरिष्ठ एवं प्रसिद्ध उलेमा द्वारा किया गया।

दिल्ली में "आइना-ए-आफ्ताब" का प्रकाशन; आयतुल्लाह सय्यद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई को सर्वोच्च नेता चुने जाने पर मराजे और उलेमा के ऐतिहासिक पैग़ामात पर आधारित अनोखा दस्तावेज़

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